रसोई में कई तरह की धातुओं के बर्तन का उपयोज किया जाता है भारतीय परंपरा में रसोई के बर्तनों से जुडी खास बातें भी बताई गई है किस धातु से बने बर्तन का उपयोग भोजन पकने और खाने में करना चाहिए।
आयुर्वेद के अनुसार ,लोहे के बर्तनों में भोजन करने से शरीर में कोई हानिकारक प्रभाव नहीं पड़ता साथ ही इससे शरीर में लौह तत्व की मात्रा बढ़ती है हीमोग्लोबिन का स्तर ठीक रहता है व पाचन संबंधित दिक्क़ते खत्म हो जाती है।
कांसे के बर्तनों में जो भोजन बनता है उसमे 97 % पोषक तत्व विधमान रहते है पिटप के बर्तन में बनने वाले भोजन में 92 % पोषक तत्व बरकार रहते है कांसे के बर्तन में भोजन करने से दिमाग तेज होता है और भूख भी बढ़ती है।
कोई अगर थोड़े महंगे बर्तन खरीद सकता है तो चंडी के बर्तनों में भोजन करना काफी लाभकारी होता है चंडी की तासीर ठंडी होती है इसलिए चंडी के बर्तन में भोजन करने से शरीर की गर्मी शांत होती है और आँखे स्वस्थ रहती है।
पुराने समय में भोजन मिटटी के बर्तनों में पकाया जाता है इन बर्तनों में भोजन पकाने से उसके पौष्टिक तत्व बने रहते है और किसी हेल्थ पर किसी प्रकार के दुष्प्रभाव भी नहीं पड़ता। शास्त्रों में पत्तल में भोजन करना काफी अच्छा बताया गया है इसमें भोजन करने से भूख बढ़ती है और परत की जलन भी खत्म होती है ताजे पत्तो की बानी पत्तल में भोजन करने से शरीर के जहरीले तत्व भी खत्म हो जाते है।
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