
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा आत्मनिर्भर भारत का आव्हान किए जाने के बाद देश आत्मनिर्भर बनने की ओर अग्रसर है। इसके चलते निकट भविष्य में प्रदेश सहित देशभर में इंफ्रास्ट्रक्चर डवलपमेंट होगा। देश की राजधानी दिल्ली तथा मुंबई सहित देश के सभी शहरों में ब्रिज, मॉल, मल्टीस्टोरीज, बिल्डिंग आदि के विस्तार के कारण स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग की डिमांड बढ़ेगी। केन्द्र सरकार के नियमानुसार बिना स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग विकास कार्य नहीं होंगे। वहीं, इस फील्ड में काम के आधार पर प्रोफेशनल्स की भारी कमी है। अतः स्टूडेंट्स इस फील्ड में अपना कॅरियर बना सकते हैं।
एक्सपर्ट्स के अनुसार इस फील्ड के डिग्री होल्डर युवाओं को शुरूआत में ही 4 लाख रुपए सालाना के आसपास का पैकेज मिल जाता है। वहीं, पांच साल बाद काम और अनुभव के आधार पर 15 लाख के पैकेज तक पहुंचा जा सकता है।
घटेंगे हादसे
यह सिविल इंजीनियरिंग की ब्रांच है। अभी सिविल इंजीनियरिंग व आर्किटेक्ट ही स्ट्रक्चर तैयार कर रहे हैं, जब इसे स्ट्रक्चरल इंजीनियर्स तैयार करेंगे तो हादसों की संभावनाएं कम रहेंगी।
बढ़ेगी मांग
कोई फर्म ज्वॉइन करने के अलावा खुद की फर्म खोली जा सकती है। फ्रीलांस कंसल्टेंट बनकर भी अपना काम किया जा सकता है, क्योंकि आने वाले समय में स्ट्रक्चरल इंजीनियर की डिमांड बढ़ने वाली है।
सब कुछ कॉन्टेक्ट लैस
एक्सपर्ट्स के अनुसार कोरोना संक्रमण को देखते हुए आने वाले समय में लोग ऐसी प्रोपर्टी पसंद करेंगे जो सेल्फ सेनेटाइजिंग हो सके। साथ ही कॉन्टेक्सलैस एसेसरीज जैसे कॉन्टेक्ट लैस लिफ्ट, बेल व ट्रेड विंडो की सुविधा हो। इसके लिए भी स्ट्रक्चरल इंजीनियर की आवश्यकता होगी।
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