समुंद्र शास्त्र के मुताबित ललाट की बात करे तो प्राचीन मुनियो ने ललाट पर सात तरह की रेखाए होती है ये रेखाए राहु केतु को छोड़कर बाकि सातो ग्रहो ही होती ललाट पर सबसे ऊपर बालो के ठीख नीचे सबसे पहली सहनी रेखा होती है ऐसे करके कई रेखाए होती है इन रेखाओ की स्थति देखकर मनुष्य के बारे में काफी कुछ पता लगाया जाता है तो चलिए जानते इन रेखाओ के बारे में ।
ललाट के मध्य में गुरु रेखा टेढ़ी और वृताकार होती है तो वो वयक्ति किसी न किसी दुख में होता है और गुरु रेखा बीच में टेढ़ी और किनारे पर सिधि हो तो वो व्यक्ति यशस्वी होता है।
अगर गुरु रेखा छोटी और शनि रेखा छिन्न भिन्न हो तो मनुष्य दुसरो की चिंता करने वाला पाय जाता है और मंगल और सूर्य की रेखा सर्पकार होने पर व्यक्ति धनहीन पाया जाता है।
शनि रेखा टेढ़ी मेढ़ी होने पर व्यक्ति व्यसनी होता है और जिसकी रेखा ललाट में तीन रेखाए सिधि ,सरल और स्पष्ट हो वह सौभाग्यशाली माना जाता है गुरु रेखा सर्पकार होने पर मनुष्य लोभी किसन का होता है ।
ललाट पर ज्यादा रेखाए टूटी फूटी होने पर मनुष्य दुर्भग्यशाली होता है ,इसके अलावा मंगल रेखाए छोटी होने दरिद्रता का संकेत होता है ।
शनि और गुरु रेखाए धनु के आकर हो होने पर मनुष्य दुष्ट होता है और ललाट पर एक ही रेखा नजरआने पर व्यक्ति एक जगह टिककर नहीं रहता है भटकता रहता है ।
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