हमारे यहां सिंदूर से मांग ना भरना अपशकुन माना जाता है ऐसा कहा जाता है की मांग भरने से पति की आयु बढ़ती है स्त्री के सौभाग्य में वृद्धि होती है सुहागिनों द्वारा सिंदूर लगाने की प्रथा खान से चलन में आई ,यह दूसरों को देखकर अपनाई गई मात्र एक परम्परा है।
सिंदूर लगाने की परम्परा का प्रमाण रामायण काल में मिलता है कहा जाता है की माता सीता रोज श्रृंगार करते समय मांग में सिंदूर भर्ती थी ऐसा उल्लेख मिलता है की एक दिन हनुमान जी नेमता सीता से पूछा कि रोज सिंदूर क्यों लगती है।
पति कि आयु बढ़ती है सीता ने बताया कि भगवान राम को सिंदूर पसंद है इससे उन्हें प्रसन्नता होती है जितनी बार वे सीता कि मांग में सिंदूर देखते है उतनी बार उनका प्रसन्न होता है।
आमतौर पर स्त्रियां अपनी मांग के बीचो -बीच सिंदूर लगती है शरीर विज्ञान के अनुसार यह स्थान ब्रह्म रंध और अध्मि नामक मर्मस्थान के ठीक ऊपर होता है।
यह स्थान विशेष रूप से स्त्रियों में बहुत कोमल होता है और बहरी प्रभावों से बहुत जल्दी संवेगित होता है स्त्रियों का मन संयमित स्त्रियां स्वभाव से भी बहुत जल्दी दूसरों कि बातों में आ जाने वाली होती है।
यह मर्मस्थल को बहरी दुष्प्रभावों से बचाता है इसलिए जो स्त्रियां माथे पर सिंदूर लगती है उनका मन भटकने या बाहरी बातों से दुष्प्रभावों होकर उलझने से बच जाता है उनके मन में नकारात्मक बातें असर नहीं डाल पातीं।
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