आचार्य चाणक्य एक कुशल राजनीतिज्ञ ,चतुर कूटनीतिज्ञ ,प्रकांड अर्थशास्त्री के रूप में जाने जाते है उनकी कुशाग्र बुद्धि और तार्किकता से सभी प्रभावित थे इसी कारन वह कौटिल्य कहे जाने लगे उन्होंने निति शास्त्र में अपने ज्ञान और अनुभव के आधार पर जहां जीवन की हर परिस्थितियों का सामना करना और सुख दुःख में विचलित न होने के लिए कई महत्वपूर्ण बातें बताई है।
चाणक्य निति कहती है की जब प्रलय का समय आता है तो समुद्र भी अपनी मर्दाया छोड़कर किनारो को तोड़ जाते है लेकिन सज्जन पुरुष प्रलय का सामना भयंकर परिस्थियों में भी करते है और अपनी मर्यादा नहीं बदलते
आचार्य चाणक्य के अनुसार रूप और यौवन से सम्पन्न और कुलीन परिवार में जन्म लेने पर भी जिस मनुष्य के पास विद्या नहीं है वह मनुष्य पलाश के फूल की तरह है जो सुन्दर तो है लेकिन खुशबु रहित है।
चाणक्य निति कहती है की वह व्यक्ति सुरक्षित रह सकता है जो परिस्थितियों उत्पन्न होने पर भाग जाए भयावह आपदा में ,विदेश आक्रमण के समय ,भयंकर अकाल की स्थिति में और दुष्ट व्यक्ति का साथ मिलने पर।
चाणक्य निति के अनुसार पांच साल तक का पुत्र का लाड और प्यार से पालन करना चाहिए 10 साल तक उसे छड़ी की मार से डराएं जब वह 16 साल का हो जाए तो उससे मित्र के समान व्यवहार करना चाहिए।
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