क्या आपको पता है कावड़ यात्रा का इतिहास क्या है और सावन के महीने में क्यों ले जाई जाती है कावड़ ! - Hindu

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Friday, August 6, 2021

क्या आपको पता है कावड़ यात्रा का इतिहास क्या है और सावन के महीने में क्यों ले जाई जाती है कावड़ !

सावन के महीने में शिवजी की पूजा करने से मिलता है अच्छा फल।



सावन के महीने में भक्त भगवान शिवजी को खुश करने के लिए अलग-अलग तरीकों से उनकी पूजा करते हैं, इन्हीं तरीकों में से एक है कांवड़ लाना ,सावन के महीने में शिवजी  के भक्त केसरिया रंग के कपड़े पहनकर कांवड़ लाते हैं, इसमें गंगा जल होता है। इन्हीं भक्तों को कांवड़ीया कहा जाता है।



 कांवड़ को सावन के महीने में ही लाया जाता है कांवड़ को सावन के महीने में लाने के पीछे की मान्यता है की इस महीने में समुन्द्र मंथन के दौरान विष निकला था, दुनिया को बचाने के लिए भगवन शिव ने इस विष को पी लिया था इस से उनका शरीर नीला पड़ गया और जलने लगा ये देख देवताओ ने उन पर जल अर्पित करना शुरू कर दिया और उनका शरीर ठंडा हुआ,  इसी लिए कावड़ को सावन के महीने में लाया जाता है।



बिना स्नान किए कावड़ यात्री कावड़ को नहीं छूते, किसी भी प्रकार की  श्रृंगार सामग्री जैसे तेल, साबुन व अन्य सामग्री का उपयोग भी कावड़ यात्रा के दौरान नहीं किया जाता, इसके अलावा कांवड़ यात्रियो के लिए नशा करना जैसे शराब,मांस आदि नशीली चीजों का सावन नहीं किया जाता।


 इसके अलावा  कांवड़ यात्रियों   के लिए चारपाई (खटिया ) पर बैठना भी  मना है. चमड़े से बनी वस्तु का स्पर्श एवं रास्ते में किसी वृक्ष या पौधे के नीचे कावड़ रखने की भी मनाही है।





Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं मान्यताओं पर आधारित हैं. Brain Remind इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें. इस खबर से सबंधित सवालों के लिए कमेंट करके बताये और ऐसी खबरे पढ़ने के लिए हमें फॉलो करना ना भूलें - धन्यवाद

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