सावन का महीना भगवान शिव को सम्पर्पित होता है इस महीने भगवान शिव को मनाने के लिए भक्त अलग अलग जतन करते है।
आज हम आपको शिव के ऐसी धाम के बारे में बताते है जहाँ जाके आपकी सारी मनोकामनएं पूरी हो जाएगी ये जगह प्रकर्ति और भक्ति का अनूठा संगम है ये जगह है उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले में स्थित जागेश्वर धाम जहाँसावन के महीने में भक्तो की भीड़ लगी रहती है ये ऐसा धार्मिक स्थल है जिसका वर्णन आपको पुराणों में भी मिलेगा।
जोगेश्वर धाम को शिव के 12 ज्योत्रिलिंगो में से एक माना जाता है ये शिव का सबसे पवित्र धाम है कहा जाता है की इस जगह सप्तऋषियों में तपस्या की थी और इसी जगह से भगवान शिव की लिंग के रूप में पूजा शुरू हुयी थी इस मंदिर की खास बात ये है की यहां भगवान शिव की पूजा बाल या तरुण रूप में भी की जाती है शिव के इस धाम में भगवान शिव को समर्पित 124 छोटे-बड़े मंदिर है मंदिरो का निर्माण लकड़ी तथा सीमेंट से नहीं हुआ है बल्कि बडी-बडी शिलाओं से इसे निर्मित किया गया है।
ये धाम देवदार के घने जंगलों के बीच बसा हुआ है ये जगह देखने में काफी लघुबसुरत है यहाँ आके आपको शांति और शुकुन मिलेगा कैलाश मानसरोवर के प्राचीन मार्ग पर स्थित इस मंदिर के बारे में मान्यता है कि जगदगुरू आदि शंकराचार्य ने इस स्थान का भ्रमण कर इसकी मान्यता को फिर से स्थापित किया सेंकडो वर्ष पुराने इस शिलालेखों में ब्रह्म लिपि और संस्कृत भाषा का प्रयोग किया गया है।
पुरात्तव विभाग ने इस मंदिर को तीन कालों में बांटा है कत्यरीकाल, उत्तर कत्यूरीकाल एवं चंद्र काल इस तपोस्थली के सारे मंदिर केदारनाथ शैली से बने हुए है इस मंदिर के किनारे पर पतली सी नदी की एक धरा बहती है इस जगह सबसे खास मंदिर 'महामृत्युंजय शिव मंदिर' है।
इस मंदिर के आलावा यहाँ पर भैरव, माता पार्वती,केदारनाथ, हनुमान, मृत्युंजय महादेव, माता दुर्गा के मंदिर भी विद्यमान है यहाँ पर हर साल सावन के महीने में श्रावणी मेला लगता है देश विदेश से भक्त आकर यहाँ पर भगवान शिव का अभिषेक करते है और यहाँ पर रूद्राभिषेक के अलावा, पार्थिव पूजा, कालसृप योग की पूजा, महामृत्युंजय जाप जैसे पूजन किए जाते हैं इस जगह पर पहुँचने के लिए सड़क मार्ग या हवाई यात्रा से पहुंच सकते है यहाँ पर रेलवे स्टेशन भी काफी नजदीक है।
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