कोई श्राप तो कोई वरदान के कारण अमर है भारत के यह धार्मिक स्थल और देवता ! - Hindu

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Tuesday, October 27, 2020

कोई श्राप तो कोई वरदान के कारण अमर है भारत के यह धार्मिक स्थल और देवता !

कोई श्राप तो कोई वरदान के कारण अमर है यह धार्मिक स्थल और देवता !



आज इस आर्टिकल में हम आपको कुछ ऐसे धार्मिक स्थल और लोगों के बारे में बताने जा रहे हैं जिनमें कुछ तो वरदान के कारण और कुछ श्राप के कारण अमर रहे हैं।




अश्वत्थामा
महाभारत के अनुसार गुरु द्रोणाचार्य के पुत्र का नाम अश्वथामा था। द्वापर युग में हुए युद्ध में अश्वत्थामा ने कौरवों की ओर से युद्ध किया था। उस समय अश्वत्थामा ने ब्रह्मास्त्र छोड़ दिया था। वह इसे वापस नहीं ले सका। इस वजह से श्रीकृष्ण ने उसे पृथ्वी पर भटकते रहने का शाप दिया था।



हनुमान :- जैसा कि आप सब जानते हैं कि हनुमान जी का जन्म हनुमान जी के रूप में ही हुआ था और जब यह माता सीता की खोज में लंका गए थे तो उनके परिश्रम से खुश होकर माता सीता ने उन्हें हमेशा अमर रहने का वरदान दिया था।




कृपाचार्य
महाभारत में कौरव और पांडवों के गुरु कृपाचार्य बताए हैं। वे परम तपस्वी ऋषि हैं। अपने तप के बल इन्हें भी चिरंजीवी माना गया है



परशुराम
भगवान विष्णु के दशावतारों में छठा अवतार परशुराम का है। परशुराम के पिता ऋषि जमदग्नि और माता रेणुका थीं। इनका प्रारंभिक नाम राम था। राम के तप से प्रसन्न होकर शिवजी फरसा भेंट में दिया था। इसके बाद राम ही परशुराम कहलाए। परशुराम का उल्लेख रामायण और महाभारत, दोनों ग्रंथों में है।



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